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    श्री शनि चालीसा, मंत्र SRI SHANI CHALISA, mantra - Forum

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    Forum » Main » Vedic mantras/ chants / Chakra / Kundalini Yoga » श्री शनि चालीसा, मंत्र SRI SHANI CHALISA, mantra
    श्री शनि चालीसा, मंत्र SRI SHANI CHALISA, mantra
    archmageDate: Monday, 30-May-2011, 2:42 PM | Message # 1
    -- dragon lord--
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    SRI SHANI CHALISA
    श्री शनि चालीसा

    जय गनेश गिरिजा सुवन. मंगल करण कृपाल.
    दीनन के दुःख दूर करि. कीजै नाथ निहाल.
    जय जय श्री शनिदेव प्रभु. सुनहु विनय महाराज.
    करहु कृपा हे रवि तनय. राखहु जन की लाज.
    जयति जयति शनिदेव दयाला. करत सदा भक्तन प्रतिपाला.
    चारि भुजा, तनु श्याम विराजै. माथे रतन मुकुट छवि छाजै.
    परम विशाल मनोहर भाला. टेढ़ी दृश्टि भृकुटि विकराला.
    कुण्डल श्रवण चमाचम चमके. हिये माल मुक्तन मणि दमके.
    कर में गदा त्रिशूल कूठारा. पल बिच करैं अरिहिं संसारा.
    पिंगल, कृश्णों, छाया, नन्दन. यम कोणस्थ, रौद्र, दुःखभंजन.
    सौरी, मन्द, शनि, दशनामा. भानु पुत्र पूजहिं सब कामा.
    जापर प्रभु प्रसन्न हो जाहीं. रंकहुं राव करै क्षण माहीं.
    पर्वतहु तृण होई निहारत. तृणहु को पर्वत करि डारत.
    राज मिलत बन रामहिं दीन्हा. कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हा.
    बनहूँ में मृग कपट दिखाई. मातु जानकी गई चुराई.
    लक्षमन विकल शक्ति के मारे. रामा दल चनंतित बहे सारे
    रावण की मति गई बौराई. रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई.
    दियो छारि करि कंचन लंका. बाजो बजरंग वीर की डंका.

    नृप विकृम पर दशा जो आई. चित्र मयूर हार सो ठाई.
    हार नौलख की लाग्यो चोरी. हाथ पैर डरवायो तोरी.
    अतिनिन्दा मय बिता जीवन. तेलिहि सेवा लायो निरपटन.
    विनय राग दीपक महँ कीन्हो. तव प्रसन्न प्रभु सुख दीन्हो.
    हरिश्चन्द्र नृप नारी बिकाई. राजा भरे डोम घर पानी.
    वक्र दृश्टि जब नल पर आई. भूंजी- मीन जल बैठी दाई.
    श्री शंकर के गृह जब जाई. जग जननि को भसम कराई.
    तनिक विलोकत करि कुछ रीसा. नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा.
    पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी. अपमानित भई द्रौपदी नारी.
    कौरव कुल की गति मति हारि. युद्ध महाभारत भयो भारी.
    रवि कहं मुख महं धरि तत्काला. कुदि परयो ससा पाताला.
    शेश देव तब विनती किन्ही. मुख बाहर रवि को कर दीन्ही.
    वाहन प्रभु के सात सुजाना. जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना.
    कौरव कुल की गति मति हारि. युद्ध महाभारत भयो भारी.
    रवि कहं मुख महं धरि तत्काला. कुदि परयो ससा पाताला.
    शेश देव तब विनती किन्ही. मुख बाहर रवि को कर दीन्ही.
    वाहन प्रभु के सात सुजाना. जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना.
    जम्बुक सिंह आदि नख धारी सो फ़ल जयोतिश कहत पुकारी.
    गज वाहन लक्ष्मी गृह आवै.हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं.
    गदर्भ हानि करै बहु काजा. सिंह सिद्ध कर राज समाजा.
    जम्बुक बुद्धि नश्ट कर डारै . मृग दे कश्ट प्राण संहारै.
    जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी. चोरी आदि होय डर भारी.
    तैसहि चारि चरण यह नामा. स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा.
    लौह चरण पर जब प्रभु आवैं. धन जन सम्पति नश्ट करावै.
    समता ताम्र रजत शुभकारी. स्वर्ण सदा सुख मंगल कारी.
    जो यह शनि चरित्र नित गावै. दशा निकृश्ट न कबहुं सतावै.
    नाथ दिखावै अदभुत लीला. निबल करे जय है बल शिला.
    जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई. विधिवत शनि ग्रह शांति कराई.
    पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत. दीप दान दै बहु सुख पावत.
    कहत राम सुन्दर प्रभु दासा. शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा.
    दोहा
    पाठ शनिचर देव को, कीन्हों विमल तैयार.
    करत पाठ चालीसा दिन, हो दुख सागर पार.


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    swastika
     
    archmageDate: Monday, 30-May-2011, 2:53 PM | Message # 2
    -- dragon lord--
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    SHANI DEV JI AARTI
    शनि देव की आरती

    जय जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी
    सूर्य पुत्र प्रभुछाया महतारी. जय जय जय शनि देव.
    श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी,
    नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी. जय...
    क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी
    मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी. जय ...
    मोदक मिश्ठान पान चढ़त हैं सुपारी
    लोहा तिल तेल उड़द महिशी अति प्यारी. जय ...
    देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी
    विशवनाथ धरत ध्यान शरन हैं तुम्हारी. जय ...


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    swastika
    Shani dev aarti wallpaper >>
    untotenawake
    http://www.aryanblood.org/photo/2-0-1415-3
     
    ManuDate: Monday, 27-June-2011, 4:00 PM | Message # 3
    --dragon lord--
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    ||शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः ॥

    शनि बीज मन्त्र – Shani Beej Mantra
    ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥


     
    ManuDate: Monday, 27-June-2011, 4:02 PM | Message # 4
    --dragon lord--
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    शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः 108 Name Mantras of Shani Dev

    ॐ शनैश्चराय नमः ॥

    ॐ शान्ताय नमः ॥

    ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ॥

    ॐ शरण्याय नमः ॥

    ॐ वरेण्याय नमः ॥

    ॐ सर्वेशाय नमः ॥

    ॐ सौम्याय नमः ॥

    ॐ सुरवन्द्याय नमः ॥

    ॐ सुरलोकविहारिणे नमः ॥

    ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः ॥

    ॐ सुन्दराय नमः ॥

    ॐ घनाय नमः ॥

    ॐ घनरूपाय नमः ॥

    ॐ घनाभरणधारिणे नमः ॥

    ॐ घनसारविलेपाय नमः ॥

    ॐ खद्योताय नमः ॥

    ॐ मन्दाय नमः ॥

    ॐ मन्दचेष्टाय नमः ॥

    ॐ महनीयगुणात्मने नमः ॥

    ॐ मर्त्यपावनपदाय नमः ॥

    ॐ महेशाय नमः ॥

    ॐ छायापुत्राय नमः ॥

    ॐ शर्वाय नमः ॥

    ॐ शततूणीरधारिणे नमः ॥

    ॐ चरस्थिरस्वभावाय नमः ॥

    ॐ अचञ्चलाय नमः ॥

    ॐ नीलवर्णाय नमः ॥

    ॐ नित्याय नमः ॥

    ॐ नीलाञ्जननिभाय नमः ॥

    ॐ नीलाम्बरविभूशणाय नमः ॥

    ॐ निश्चलाय नमः ॥

    ॐ वेद्याय नमः ॥

    ॐ विधिरूपाय नमः ॥

    ॐ विरोधाधारभूमये नमः ॥

    ॐ भेदास्पदस्वभावाय नमः ॥

    ॐ वज्रदेहाय नमः ॥

    ॐ वैराग्यदाय नमः ॥

    ॐ वीराय नमः ॥

    ॐ वीतरोगभयाय नमः ॥

    ॐ विपत्परम्परेशाय नमः ॥

    ॐ विश्ववन्द्याय नमः ॥

    ॐ गृध्नवाहाय नमः ॥

    ॐ गूढाय नमः ॥

    ॐ कूर्माङ्गाय नमः ॥

    ॐ कुरूपिणे नमः ॥

    ॐ कुत्सिताय नमः ॥

    ॐ गुणाढ्याय नमः ॥

    ॐ गोचराय नमः ॥

    ॐ अविद्यामूलनाशाय नमः ॥

    ॐ विद्याविद्यास्वरूपिणे नमः ॥

    ॐ आयुष्यकारणाय नमः ॥

    ॐ आपदुद्धर्त्रे नमः ॥

    ॐ विष्णुभक्ताय नमः ॥

    ॐ वशिने नमः ॥

    ॐ विविधागमवेदिने नमः ॥

    ॐ विधिस्तुत्याय नमः ॥

    ॐ वन्द्याय नमः ॥

    ॐ विरूपाक्षाय नमः ॥

    ॐ वरिष्ठाय नमः ॥

    ॐ गरिष्ठाय नमः ॥

    ॐ वज्राङ्कुशधराय नमः ॥

    ॐ वरदाभयहस्ताय नमः ॥

    ॐ वामनाय नमः ॥

    ॐ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः ॥

    ॐ श्रेष्ठाय नमः ॥

    ॐ मितभाषिणे नमः ॥

    ॐ कष्टौघनाशकर्त्रे नमः ॥

    ॐ पुष्टिदाय नमः ॥

    ॐ स्तुत्याय नमः ॥

    ॐ स्तोत्रगम्याय नमः ॥

    ॐ भक्तिवश्याय नमः ॥

    ॐ भानवे नमः ॥

    ॐ भानुपुत्राय नमः ॥

    ॐ भव्याय नमः ॥

    ॐ पावनाय नमः ॥

    ॐ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः ॥

    ॐ धनदाय नमः ॥

    ॐ धनुष्मते नमः ॥

    ॐ तनुप्रकाशदेहाय नमः ॥

    ॐ तामसाय नमः ॥

    ॐ अशेषजनवन्द्याय नमः ॥

    ॐ विशेशफलदायिने नमः ॥

    ॐ वशीकृतजनेशाय नमः ॥

    ॐ पशूनां पतये नमः ॥

    ॐ खेचराय नमः ॥

    ॐ खगेशाय नमः ॥

    ॐ घननीलाम्बराय नमः ॥

    ॐ काठिन्यमानसाय नमः ॥

    ॐ आर्यगणस्तुत्याय नमः ॥

    ॐ नीलच्छत्राय नमः ॥

    ॐ नित्याय नमः ॥

    ॐ निर्गुणाय नमः ॥

    ॐ गुणात्मने नमः ॥

    ॐ निरामयाय नमः ॥

    ॐ निन्द्याय नमः ॥

    ॐ वन्दनीयाय नमः ॥

    ॐ धीराय नमः ॥

    ॐ दिव्यदेहाय नमः ॥

    ॐ दीनार्तिहरणाय नमः ॥

    ॐ दैन्यनाशकराय नमः ॥

    ॐ आर्यजनगण्याय नमः ॥

    ॐ क्रूराय नमः ॥

    ॐ क्रूरचेष्टाय नमः ॥

    ॐ कामक्रोधकराय नमः ॥

    ॐ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः ॥

    ॐ परिपोषितभक्ताय नमः ॥

    ॐ परभीतिहराय नमः ॥

    ॐ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः ॥

    ॥इति शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णम् ॥


    untotenreich

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    ManuDate: Tuesday, 12-July-2011, 1:27 AM | Message # 5
    --dragon lord--
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    श्री शनि चालीसा SRI SHANI CHALISA

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    ManuDate: Tuesday, 12-July-2011, 10:47 AM | Message # 6
    --dragon lord--
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    img link (open, right click save) - http://www.aryanblood.org/imp/Shani-chalisa.jpg

    untotenreich


     
    ManuDate: Tuesday, 27-September-2011, 12:02 PM | Message # 7
    --dragon lord--
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    ||Nilanjan Samabhasam Raviputram Yamagrajam
    ChhayaMartand Sambhootam, Tam Namami Shanaishcharam||

    निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
    छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥


    Meaning - I bow to Lord Shani, who is black in colour and son of Sun and born to Chaya and brother of Yama , who moves very slowly.

    Om Sham Shanaischaryaye Namah

    Lord Shani Dev Mantra is supposed to chanted for 23000 times.
    Today is Shani Jayanti and Shani Amavasya. On this auspicious occassion I offer this mantra on the lotus feet of Shani Dev Maharaj. May Shani Dev bless you all.


     
    starlightDate: Wednesday, 27-February-2013, 12:54 PM | Message # 8
    -- dragon lord--
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    Sanaischara (Sanskrit --"slow mover") is reputed to be both, a giver and destroyer. Prayers to Sanaischara alleviates the problems and worries. Of all the nine planets, Sanaischara, the off spring of Surya and Chaaya, inspires the most awe. This is because he is said to hold sway over a person's Satum is a karaka, or indicatior, of longevity, Misery, sorrow, old age and death, discipline, restriction, responsibility, delays, ambition, leadership and authority, hard work, organization, reality and time itself. Starting form the position of this planet in the horoscope to the corresponding placement s of other planets. Lord Sani is believed to influence the course of one's life. Sanaischara resides in each Rasi for a period of 2 ½ years. When Sanaischara resides in the 12th, 1st and 2nd house, it is 7 ½ Naatu Sani; when in the 4th house, it is Ardhastama Sani; when in the 8th house, it is Ashtama Sani. During these periods, he trobles the native. Problems form Government, wife children slowdown in business, loss of property, diseases are caused by the transit of Sani. In a person's life 7 ½ Naatu Sani aspects thrice, the first called Mngu Sani, the second called Pongu Sani and the third called Marana Sani, DHYANAM: "Nilanjana samabhasam Ravi putram Yamarjam, chaya marttanda Sambhutam tam namami sanaischaram'MOOLA MANTRA": "Aum hrim shrim graham sakravartine Sanaischaraya klim aim such svaha "GAYATRI: Aum Sanaischaraya vidhamhe, sooryaputraya dhimahi, tanno manda prachodayat. Sanaischara is a beneficient "graha" Any adverse effect is due to placement in an individual horoscope which could be overcome by worshipping him


     
    ManuDate: Saturday, 20-August-2016, 9:03 PM | Message # 9
    --dragon lord--
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    Sanaischara(one who moves slowly) aka Saneeswara (The god who is slow) is the planet Saturn among the nine planets. He is the son of Surya and Chaya and is the only planet with the epithet Iswara(god). He takes 30 years to make a full round of the Sun and so he becomes the slowest among the planets. He was made lame by his half brother Yama(God of death). He is the indicator of longevity, diseases, death, base actions, reason for death, danger, slave hood and cattle wealth in a person’s horoscope.

    Sahasranama (Devanagariसहस्रनाम) is a Sanskrit term which means "a thousand names". It is also a genre of stotra literature, usually found as a title of the text named after a deity, such as Vishnu Sahasranāma, wherein the deity is remembered by 1,000 names, attributes or epithets.


     
    ManuDate: Tuesday, 17-January-2017, 11:17 PM | Message # 10
    --dragon lord--
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    Listen and Chant this Shani Mantras - Very Powerful Mantras to Remove Malefic Effect Of Shani - Shani Peyarchi 2017 - Dr.R.Thiagarajan

    Shani Gayatri Mantra - 00:03
    Sri Sanaischara Ashtottara Satanamavalli - 01:35
    Sri Sanaischara Ashtakam - 05:48
    Sri Sanaischara Kavacham - 09:30
    Sri Sanaischara Mangalam - 12:56

    Planet Saturn is called Sanaischara, which means, "slow mover". Saturn signifies misery, sorrow, death, discipline, restriction, constraints, delays, humility. In Sanskrit Shani is called Sanischara, which means, " slow mover ". Shani Dev is a son of Surya Devta (Sun) and Chhaya (Suvarna). Lord Shani Dev is the brother of Yama Dev (deity of death). He is generally depicted in dark complexion, clothed in black. Shani Graha have a seventh place among navagraha.

    Sani(slow one) aka Sanaischara(one who moves slowly) aka Saneeswara (The god who is slow) is the planet Saturn among the nine planets. He is the son of Surya and Chaya and is the only planet with the epithet Iswara(god). He takes 30 years to make a full round of the Sun and so he becomes the slowest among the planets. He was made lame by his half brother Yama(God of death). He is the indicator of longevity, diseases, death, base actions, reason for death, danger, slave hood and cattle wealth in a person’s horoscope.


     
    ManuDate: Friday, 15-March-2019, 3:01 PM | Message # 11
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    108 Names of Lord Shani Dev |Sri Sanaischara Ashtottara Shatanamavali | Star Birthday of Lord Shani


    Geethanjali - Music and Chants
    Published on Mar 12, 2019

    108 Names of Lord Shani Dev |Sri Sanaischara Ashtottara Shatanamavali | Star Birthday of Lord Shani - Must Listen

    Chant by Dr.R.Thiagarajan

    00:03 - Sri Sanaischara Ashtottara Shatanamavali

    Shani (Sanskrit: शनि, Śani) refers to the planet Saturn, and is one of the nine heavenly objects known as Navagraha in Hindu astrology.Shani is also a male deity in the Puranas, whose iconography consists of a handsome figure carrying a sword or danda (sceptre), and sitting on a crow. He is a god of Justice in Hindu mythology and he gives benefits to all, depending upon their deeds (karma). His consort is goddess Manda


     
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